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आईसीआईसीआई बैंक का शुद्ध लाभ छह गुना बढ़कर 4251 करोड़ रुपये पहुंचा

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आईसीआईसीआई बैंक का शुद्ध लाभ छह गुना बढ़कर 4251 करोड़ रुपये पहुंचा

ICICI बैंक की परिचालन आय दूसरी तिमाही में 23650 करोड़ रुपये रही

नई दिल्ली:

आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank) के शुद्ध लाभ में छह गुना उछाल आया है. 30 सितंबर को समाप्त दूसरी तिमाही में ICICI बैंक का शुद्ध लाभ 4,251 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछली तिमाही के मुकाबले छह गुना अधिक है.

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आईसीआईसीआई बैंक ने वर्ष 2019-20 की इसी तिमाही में 655 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया था. निजी क्षेत्र के इस बैंक ने शेयर बाजार (Stock Market) को शनिवार को जानकारी दी कि दूसरी तिमाही में एकल आधार पर उसकी परिचालन आय 23,650.77 करोड़ रुपये रही. पिछले साल इसी तिमाही में यह 22,759.52 करोड़ रुपये थी.

इसी तरह बैंक के फंसे कर्ज (एनपीए) की स्थिति में भी सुधार आया है. बैंक का सकल एनपीए इस दौरान कुल कर्ज का 5.17 प्रतिशत यानी 38,989.19 करोड़ रुपये रहा. पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 45,638.79 करोड़ रुपये था. बैंक का शुद्ध एनपीए समीक्षावधि में उसके शुद्ध ऋण का एक प्रतिशत यानी 7,187.51 करोड़ रुपये रहा. पिछले साल इसी अवधि में यह 1.60 प्रतिशत यानी 10,916.40 करोड़ रुपये था.

एकीकृत आधार पर बैंक का शुद्ध लाभ समीक्षावधि में चार गुना बढ़कर 4,882 करोड़ रुपये रहा. इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 1,131 करोड़ रुपये था. इस दौरान बैंक की एकीकृत आय 39,321.42 करोड़ रुपये रही जो पिछले साल इसी अवधि में 37,424.78 करोड़ रुपये थी. बैंक का फंसे कर्ज के लिए प्रावधान 2,995.27 करोड़ रुपये रहा है. इससे पिछले साल इसी अवधि में यह राशि 2,506.87 करोड़ रुपये थी. बैंक ने 30 सितंबर को समाप्त तिमाही में कोविड-19 से संबंधित प्रावधानों पर 8,772 करोड़ रुपये का पूंजी खर्च दिखाया है.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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उम्मीद से अधिक तेजी से उबर रही भारतीय अर्थव्यवस्था : रिपोर्ट

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उम्मीद से अधिक तेजी से उबर रही भारतीय अर्थव्यवस्था : रिपोर्ट

प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली:

भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) संभवत: उम्मीद से अधिक तेजी से उबर रही है और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ब्याज दरों में नरमी के रुख को अब छोड़ सकता है. वैश्विक स्तर पर पूर्वानुमान लगाने वाली कंपनी ऑक्सफोर्ड इकानॉमिक्स (Oxford economics) की एक रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में मुद्रास्फीति औसतन छह प्रतिशत से अधिक रहेगी और केंद्रीय बैंक दिसंबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दरों को यथावत रखेगा.

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रिपोर्ट कहती है, ‘‘उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति अक्टूबर में कोविड-19 से पूर्व के उच्चस्तर पर पहुंच गई है. ईंधन को छोड़कर अन्य श्रेणियों में दाम बढ़े हैं. चौथी तिमाही में मुद्रास्फीति अपने अधिकतम स्तर पर होगी और 2021 में हमें इस पर अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत होगी.”

अंडों तथा सब्जियों के दाम चढ़ने से अक्टूबर में खुदरा मुद्रास्फीति करीब साढ़े छह साल के उच्चस्तर 7.61 प्रतिशत पर पहुंच गई है. यह रिजर्व बैंक के संतोषजनक स्तर से कहीं अधिक है. सितंबर, 2020 में खुदरा मुद्रास्फीति 7.27 प्रतिशत पर थी.

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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आईटी कंपनियों को तोहफा, ‘वर्क फ्रॉम होम’ के साथ वर्क फ्रॉम एनिवेयर को बढ़ावा देगी सरकार

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आईटी कंपनियों को तोहफा, ‘वर्क फ्रॉम होम’ के साथ वर्क फ्रॉम एनिवेयर को बढ़ावा देगी सरकार

केंद्र ने BPO और आईटी सेवा (ITES) प्रदाता कंपनियों के लिए नियम सरल किए

नई दिल्ली:

केंद्र सरकार ने आईटी (IT) और बीपीओ (BPO) कंपनियों के लिए कामकाज के नियमों को आसान बना दिया है. इससे इन कंपनियों में वर्क फ्रॉम होम (घर से काम) की जगह वर्क फ्रॉम एनिवेयर (कहीं से भी काम) को बढ़ावा मिलेगा. ये उद्योग लंबे समय से सरकार से नियमों में बदलाव की मांग कर रहे थे.

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केंद्र ने बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (BPO) और आईटी आधारित सेवाएं (ITES) प्रदाता कंपनियों के लिए दिशानिर्देशों को सरल कर दिया है. इससे उद्योग का अनुपालन बोझ कम होगा. साथ ही ‘Work From Home’ और ‘Work From Anywhere’ को बढ़ावा मिलेगा. नए नियमों से सेवाप्रदाताओं के लिए ‘घर से काम’ और ‘कहीं से भी काम’ के लिए अनुकूल माहौल बनेगा. ऐसी कंपनियों के लिए समय-समय पर रिपोर्टिंग और अन्य सेवा शर्तों को समाप्त कर दिया गया है.

आईटी उद्योग ‘वर्क फ्रॉम होम’ को लेकर लंबे समय से राहत दिए जाने की मांग कर रहा था और इसे स्थायी आधार पर जारी रखने की मांग कर रहा था. ओएसपी ऐसी कंपनियां हैं जो दूरसंचार संसाधनों का इस्तेमाल कर ऐप्लिकेशन, आईटी से जुड़ी सेवाएं या किसी प्रकार की आउटसोर्सिंग सेवाएं देती है. ऐसी कंपनियों को बीपीओ, नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिंग (KPO), आईटीईएस और कॉल सेंटर (Call Centre) भी कहा जाता है. दूरसंचार के दिशानिर्देशों के अनुसार, ‘वर्क फ्रॉम होम’ का विस्तार कर इन कंपनियों को ‘वर्क फ्रॉम एनिवेयर’ उपलब्ध कराया जा रहा है.

रिमोट एजेंट कहीं से भी काम कर सकेगा

एजेंट/रिमोट एजेंट की स्थिति (वर्क फ्रॉम होम/एनिवेयर) की कुछ शर्तों के साथ मंजूरी दी गई है. इसमें कहा गया है कि घर पर एजेंट को ओएसपी केंद्र का ‘रिमोट एजेंट’ माना जाएगा. इंटरनकनेक्शन की अनुमति होगी. रिमोट एजेंट को देश में किसी भी स्थान से काम करने की अनुमति होगी. नए नियमों के तहत, ओएसपी के लिए पंजीकरण की जरूरत को समाप्त कर दिया गया है. डेटा से संबंधित कार्य से जुड़े बीपीओ उद्योग को इन नियमों के दायरे से बाहर कर दिया गया है.

भारत को आईटी क्षेत्र में और प्रतिस्पर्धी बनाने का कदम

नए नियमों का मकसद आईटी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के साथ भारत को सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी आईटी स्थान के रूप में पेश करना है. नए नियमों से कंपनियों को ‘वर्क फ्रॉम होम’ और ‘वर्क फ्रॉम एनिवेयर’ के अनुकूल नीति अपनाने में मदद मिलेगी. केंद्र ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जबकि कोरोना महामारी के कारण आईटी/बीपीओ कंपनियां अपने कर्मचारियों से घर से काम ले रही हैं.

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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क्या Covid-19 लोन रिलीफ से आपको होगा फायदा? क्या क्रेडिट कार्ड बकाए पर मिलेगी राहत? यहां जानिए

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सरकार ने बताया है कि यह रकम उधारकर्ताओं के लोन अकाउंट में दीवाली से पहले भेज दी जाएगी. सरकार ने कहा है कि कर्जदारों के खातों में यह रकम जमा करने के बाद ऋणदाता केंद्र सरकार से इस राशि के भुगतान का दावा कर सकेंगे.

लेकिन असली सवाल है कि इस योजना से किसको फायदा होगा?

यह लोन रिलीफ पर्सनल, हाउसिंग, एजुकेशन, ऑटो और कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन, MSME और कुछ शर्तों के तहत आने वाले क्रेडिट कार्ड के बकाए पर मिलेगा. उधारकर्ता भले ही पूरे या आंशिक राहत क विकल्प चुने, ऋणदाता यह रकम उनके अकाउंट में भेज देंगे. लोन अकाउंट 29 फरवरी तक सक्रिय और इसका लिमिट 2 करोड़ के भीतर होना अनिवार्य है.

इस योजना में यह भी कहा गया है कि पात्र उधारकर्ताओं को भी स्वैच्छिक राहत मिलेगी, चाहे भले ही उन्होंने छह महीने की अवधि के भीतर के भुगतान पर राहत चुना न हो या नही. दूसरे शब्दों में अगर आपने अपने बैंक या फाइनेंसर से कोरोनावायरस लॉकडाउन के चलते राहत मांगा हो या नहीं, आपके लोन अकाउंट में यह रकम आ जाएगी.

यह भी पढ़ें : लोन मोरेटोरियम मामले में केंद्र के ऐलान से लोन लेने वाले 75% कर्जदारों को मिलेगा फायदा: रिपोर्ट

यह राहत की रकम क्या है, और आपके अकाउंट में कितना पैसा आएगा?

RBI के इस नॉटिफिकेशन में कहा गया है कि योजना के तहत सभी कर्ज देने वाली संस्थाएं एक मार्च, 2020 से 31 अगस्त, 2020 के बीच की अवधि के लिए सभी पात्र कजदारों के खातों में चक्रवृद्धि और सामान्य ब्याज के अंतर की रकम जमा करेंगे.

चक्रवृद्धि ब्याज या कंपाउंड इंटरेस्ट, जिसे ब्याज पर ब्याज भी कहा जाता है, मूल धन के भुगतान में हुई देरी पर बना हुआ ब्याज होता है. यानी कि लोन चुकाने में देरी हुई तो बैंकिंग के सामान्य नियमों के तहत इस अवधि में ब्याज पर अलग से ब्याज चढ़ने लगता है. सुप्रीम कोर्ट में लोन मोरेटोरियम अवधि में ब्याज पर ब्याज में राहत को लेकर एक याचिका पर सुनवाई चल रही है. 

इस महीने सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से कहा था कि सरकार जल्द से जल्द पात्र उधारकर्ताओं को लोन रिलीफ पहुंचाए क्योंकि इस योजना में देरी किया जाना सामान्य जनता के हित में नहीं है. दरअसल, आरबीआई ने लोन मोरेटोरियम अवधि की घोषणा करते हुए कहा था कि मार्च और अगस्त के बीच उधारकर्ताओं के पास लोन की किश्तें न चुकाने की छूट है. केंद्रीय बैंक ने इसके साथ ही ऋणदाताओं को इस दौरान बन रहे कंपाउंड इंटरेस्ट लेने की अनुमति भी दे दी थी. यानी कि बैंक और ऋणदाता संस्थाएं अपने ग्राहकों को यह छूट दे रही थीं कि वो मार्च से अगस्त के बीच अपने लोन की किश्त न चुकाएं, लेकिन उधारकर्ताओं को फिर अपने इस अवधि में जमा हुआ कंपाउंड इंटरेस्ट भरना था.

Video: रवीश कुमार का प्राइम टाइम: बड़े लोन से नुकसान नहीं, छोटे लोन से इतना घाटा?

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