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स्वास्थ्य

कमर और पीठ दर्द के लिए जरूर करें मार्जरी आसन, चुटकियों में दर्द होगा दूर

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कोरोना (Corona) महामारी के समय घर पर बैठे लोगों के लिए शरीर को फिट (Fit) और हेल्दी (Healthy) रखना बहुत जरूरी है. खासकर उन लोगों को जो घंटो घर से वर्क फ्रॉम होम कर रहे हैं. उनके लिए योग (Yoga) का अभ्यास करना बहुत जरूरी है. दिनभर में कम से कम एक घंटा योग पर जरूर दें. इन अभ्यासों को करने से न केवल मनुष्य स्वस्थ (Healthy) रह सकता है बल्कि उसे हर प्रकार के तनाव (Stress) से भी मुक्ति मिलती है. योग एक कला है और इसका अभ्यास धीरे-धीरे करना चाहिए. अभ्यास करते हुए ही यह एक आदत के रूप में उभर कर आएगा. वर्क फ्रॉम होम करने वालों को इन दिनों अक्सर कमर, पीठ और कंधे में दर्द की शिकायत हो रही है. ऐसे में फेसबुक के इस लाइव सेशन में कुछ ऐसे योगासन बताए जाएंगे जिनकी मदद से कमर, पीठ और कंधे का दर्द चुटकियों में गायब होगा.

दंडासन
दंडासन एक संस्कृत का शब्द है जो दो शब्दों से मिलकर बना है, जिसमें पहला शब्द डंडा का अर्थ छड़ी या स्टिक है और दूसरा शब्द आसन का अर्थ पोज या मुद्रा है. इसे अंग्रेजी में स्टाफ पोज (Staff Pose) के नाम से भी जाना जाता है. दंडासन एक ऐसा अभ्यास है जो शरीर को उन्नत आसन करने के लिए तैयार करता है. यह शरीर को पूरी तरह से संरेखित करने के लिए क्षमता को भी बढ़ाता है. दंडासन, योग मुद्रा का एक सरल आसन है. यह आत्म-जागृति की ऊर्जा के लिए मार्ग बनाता है. इसलिए दंडासन को शक्ति और अच्छे रूप को बढ़ावा देने के लिए आदर्श आसन माना जाता है, जो किसी की आध्यात्मिक यात्रा का समर्थन करता है.

दंडासन करने के फायदेकंधों में खिंचाव के लिए लाभदायक

रीढ़ की हड्डी को लचीला और मजबूत बनाने के लिए
मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए
सायटिका दर्द में लाभकारी
मस्तिष्क को शांत करता है
पाचन शक्ति को बढ़ाता है

तितली आसन
तितली आसन करने के लिए अपने दोनों पैरों को सामने की ओर सीधा कर के बैठ जाएं. रीढ़ की हड्डी सीधी रखें. अब पैरों को मोड़कर हाथों की उंगलियों को पैरों के पंजों के ऊपर लाकर आपस में मिला दें. इस दौरान आपकी एडियां शरीर से सटी हुई होनी चाहिए. सामान्‍य रूप से सांस लेते हुए दोनों पैरों को एक साथ ऊपर ले जाएं और फिर नीचे लाएं. आपको ऐसा 15 से 20 बार करना है.

मार्जरी आसन
मार्जरी आसन को अंग्रेजी में कैट पोज (Cat pose) के नाम से बुलाया जाता है. इसे कैट खिंचाव मुद्रा के रूप में भी जाना जाता है. इस आसन को करने से रीढ़ और पीठ की मांसपेशियों का लचीलापन बना रहता है. मार्जरी आसन एक आगे की ओर झुकने और पीछे मुड़ने वाला योग आसन है. कैट वॉक दुनिया भर में प्रसिद्ध है, लेकिन हम योग आसन वर्ग में कैट पोज के बारे में चर्चा करते हैं. यह आसन आपके शरीर के लिए अनके प्रकार से लाभदायक है. यह आसन रीढ़ की हड्डी को एक अच्छा खिंचाव देता है. इसके साथ यह पीठ दर्द और गर्दन दर्द में राहत दिलाता है.

मार्जरी आसन के फायदे
रीढ़ की हड्डी को अधिक लचीला बनने में मदद करता है
पाचन क्रिया में सुधार करने में मदद करती है
रक्त परिसंचरण में सुधार करती है
पेट से अनावश्यक वसा को कम करने में मदद करता है
पेट को टोन करने में मदद करता है
तनाव को दूर करने में बहुत मदद करता है
मन को शांत करके मानसिक शांति प्रदान करता है
कंधे और कलाई दोनों को मजबूत बनाता है

ग्रीवा शक्ति आसन
इस योग क्रिया को करने के लिए अपनी जगह पर खड़े हो जाएं. जो लोग खड़े होकर इस क्रिया को करने में असमर्थ हैं वे इसे बैठकर भी कर सकते हैं. जो जमीन पर नहीं बैठ सकते वे कुर्सी पर बैठकर भी इसका अभ्यास कर सकते हैं. कंफर्टेबल पोजीशन में खड़े होकर हाथों को कमर पर टिकाएं. शरीर को ढीला रखें. कंधों को पूरी तरह से रिलैक्स रखें. सांस छोड़ते हुए गर्दन को आगे की ओर लेकर आएं. चिन को लॉक करने की कोशिश करें. जिन लोगों को सर्वाइकल या गर्दन में दर्द की समस्या हो वह गर्दन को ढीला छोड़ें चिन लॉक न करें. इसके बाद सांस भरते हुए गर्दन को पीछे की ओर लेकर जाएं.

सांस छोड़ते हुए फिर गर्दन को आगे की ओर लेकर जाएं. इसके बाद शरीर को पूरी तरह से ढीला छोड़ दें. इस क्रिया को 8 से 10 बार करें. इसके बाद दूसरी क्रिया करनी है. सांस छोड़ते हुए दाईं ओर गर्दन को झुकाएं. सांस भरते हुए सेंटर में गर्दन लेकर आएं. फिर सांस छोड़ते हुए बाईं ओर गर्दन लेकर जाएं और सांस भरते हुए सेंटर में गर्दन ले आएं. इसके बाद शरीर को ढीला छोड़ दें. गदर्न के दर्द को कम करने, शरीर और माइंड को रिलैक्स करने के लिए ये क्रिया बेस्ट है.

इसे भी पढ़ेंः योग के लिए सबसे जरूरी स्ट्रेचिंग, इन आसनों की मदद से बॉडी में लाएं लचीलापन

मर्कट आसन
मर्कट का अर्थ बंदर होता है, इसलिए इस आसन को बंदर आसन भी कहा जाता है. ये आसन करते समय शरीर का आकार बंदर जैसा हो जाता है. यह आसन कमर दर्द और पेट की चर्बी घटाने के लिए काफी लाभकारी होता है. इसे करने से शरीर का लचीलापन बढ़ता है, हाथ-पैरों और कमर का दर्द और मोटापा कम होता है.

ऐसे करें अभ्यास
पहले पीठ के बल लेटकर दोनों हाथों को कमर से नीचे रखें. दोनों पैरों को जोड़कर घुटनों से मोड़ लें. अब कमर से नीचे के हिस्से को ट्विस्ट करते हुए पैरों को एक बार दाईं तरफ बगल में जमीन पर टिका दें. इस अवस्था में सिर को उसकी उलटी दिशा में रखते हैं. इस आसन को 10 से 20 सेकंड से शुरू करते हुए टाइमिंग बढ़ानी है. जमीन पर सीधे लेट जाएं. दोनों पैरों के बीच फासला रखें और और उन्हें घुटनों से मोड़ लें. अब बायां घुटना बगल में जमीन पर टिका दें और दायां घुटना बायें पैर के अंगूठे पर रख दें. इस अवस्था में सिर को विपरीत दिशा में घुमाकर रखें. जमीन पर सीधे लेट जाएं. दाहिने पैर को कमर से सीधा उठाते हुए बायीं तरफ जहां तक हो सके लेकर जाएं. इसे करने की आदर्श स्थिति में दाहिने पैर से बायें हाथ को जमीन पर रखते हुए छूना है. इसी तरह दूसरे पैर से भी करना है. इस आसन को करते समय गर्दन विपरीत दिशा में रखनी है.

मर्कट आसन के फायदे
मर्कट आसन करने से पीठ के दर्द में राहत मिलती है और रीड की हड्डियों का रोग दूर होता है. सर्वाइकल, पेट दर्द, गैस, कमर दर्द, अपाचन, कूल्हों के दर्द, अनिद्रा थकान में मर्कट आसन बहुत ही लाभदायक है. इसके साथ ही मर्कट आसन करने से किडनी, अग्नाशय और लीवर सक्रिय हो जाते हैं.

अश्विनी मुद्रा
जैसे अश्व (घोड़ा) लीध करने के बाद अपने गुदाद्वार को बार-बार सिकोड़ता ढीला करता है, उसी प्रकार गुदाद्वार को सिकोड़ना और फैलाने की क्रिया को ही अश्विनी मुद्रा कहते हैं. घोड़े में इतनी शक्ति और फुर्ती का रहस्य यही मुद्रा है. इसलिए इंजन की ताकत अश्व शक्ति (हॉर्स पावर) से मापी जाती है. यह ऐंटी ग्रेविटी अभ्यास है. इससे शरीर को चलाने वाली ऊर्जा बढ़ती है. सभी अंगों को बल मिलता है, शरीर की ताकत बढ़ती है, हृदय को बल देने वाली यह क्रिया हर्निया, मूत्र दोष, गुदा सम्बन्धी रोग, बवासीर, कब्ज व स्त्री रोगों में बड़ी उपयोगी है. इसके अभ्यास से मूलाधार चक्र में स्थित कुण्डलिनी शक्ति जागने लगती है और लोगों को लम्बे समय तक युवा बनाए रखती है.

हलासन
हलासन को अंग्रेजी भाषा में Halasana और Plow Pose भी कहा जाता है. अन्य योगासनों की तरह ही हलासन को भी उसका नाम खेती में उपयोग किए जाने वाले एक उपकरण से ही मिला है. हलासन के अभ्यास से शरीर कई ऐसी शक्तियों को वापस सक्रिय करने की शक्ति हासिल कर पाता है.

कैसे करें हलासन
योग मैट पर पीठ के बल लेट जाएं. अपने हाथों को शरीर से सटा लेंच. हथेलियां जमीन की तरफ रहेंगी. सांस भीतर की ओर खींचते हुए पैरों को ऊपर की तरफ उठाएं. टांगे कमर से 90 डिग्री का कोण बनाएंगी. दबाव पेट की मांसपेशियों पर रहेगा. टांगों को ऊपर उठाते हुए अपने हाथों से कमर को सहारा दें. सीधी टांगों को सिर की तरफ झुकाएं और पैरों को सिर के पीछे ले जाएं. पैरों के अंगूठे से जमीन को छुएंगे. हाथों को कमर से हटाकर जमीन पर सीधा रख लें. हथेली नीचे की तरफ रहेगी. कमर जमीन के समानांतर रहेगी. इसी स्थिति में एक मिनट तक बने रहें सांसों पर ध्यान केंद्रित करें सांस छोड़ते हुए, टांगों को वापस जमीन पर ले आएं. आसन को छोड़ते हुए जल्दबाजी न करें. टांगों को एक समान गति से ही सामान्य स्थिति में वापस लेकर आएं.

हलासन के फायदे
पाचन तंत्र के अंगों की मसाज करता है और पाचन सुधारने में मदद करता है
मेटाबॉलिज्म बढ़ाता है और वजन घटाने में मदद करता है
डायबिटीज के मरीजों के लिए ये बेस्ट आसन है क्योंकि ये शुगर लेवल को कंट्रोल करता है
ये रीढ़ की हड्डी में लचीलापन बढ़ाता और कमर दर्द में आराम देता है
ये स्ट्रेस और थकान से निपटने में भी मदद करता है
दिमाग को शांति मिलती है

भुजंगासन
भुजंगासन, सूर्य नमस्कार के 12 आसनों में से 8वां है. भुजंगासन को सर्पासन, कोबरा आसन या सर्प मुद्रा भी कहा जाता है. इस मुद्रा में शरीर सांप की आकृति बनाता है. ये आसन जमीन पर लेटकर और पीठ को मोड़कर किया जाता है जबकि सिर सांप के उठे हुए फन की मुद्रा में होता है.

भुजंगासन के फायदे
रीढ़ की हड्डी में मजबूती और लचीलापन
पेट के निचले हिस्से में मौजूद सभी अंगों के काम करने की क्षमता बढ़ती है
पाचन तंत्र, मूत्र मार्ग की समस्याएं दूर होती हैं और यौन शक्ति बढ़ती है
मेटाबॉलिज्म सुधरता है और वजन कम करने में मदद मिलती है
कमर का निचला हिस्सा मजबूत होता है
फेफड़ों, कंधों, सीने और पेट के निचले हिस्से को अच्छा खिंचाव मिलता है
डिप्रेशन में भी इससे फायदा मिलता है
अस्थमा में भी राहत

पश्चिमोत्तानासन
पश्चिमोत्तानासन योग का नाम दो शब्दों के मेल से बना है- पश्चिम और उत्तान. पश्चिम यानी पश्चिम दिशा या शरीर का पिछला हिस्सा और उत्तान मतलब खिंचा हुआ. रीढ़ की हड्डी के दर्द से निजात पाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को पश्चिमोत्तानासन योग करना चाहिए. इस आसन का अभ्यास करते समय शरीर के पिछले हिस्से यानी रीढ़ की हड्डी में खिंचाव उत्पन्न होता है, इस कारण इस आसन को पश्चिमोत्तानासन कहा जाता है. इस आसन को करने से शरीर का पूरा हिस्सा खिंच जाता है और यह शरीर के लिए बहुत लाभदायक होता है. जिन लोगों को डायबिटीज की समस्या होती है, उनके लिए पश्चिमोत्तानासन रामबाण की तरह काम करता है और इस रोग के लक्षणों को दूर करने में मदद करता है. इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से ग्रसित लोगों के लिए भी यह आसन बहुत फायदेमंद माना जाता है.

पश्चिमोत्तानासन के फायदे
तनाव दूर करने में फायदेमंद
पेट की चर्बी दूर करने में मददगार
हड्डियों को लचीला बनाने में कारगर
बेहतर पाचन के लिए फायदेमंद
अनिद्रा की समस्या को दूर करता है

कपालभाती
कपाल भाति बहुत ऊर्जावान उच्च उदर श्वास व्यायाम है. कपाल अर्थात मस्तिष्क और भाति यानी स्वच्छता अर्थात ‘कपाल भाति’ वह प्राणायाम है जिससे मस्तिष्क स्वच्छ होता है और इस स्थिति में मस्तिष्क की कार्यप्रणाली सुचारु रूप से संचालित होती है. वैसे इस प्राणायाम के अन्य लाभ भी हैं. लीवर किडनी और गैस की समस्या के लिए बहुत लाभ कारी है. कपालभाति प्राणायाम करने के लिए रीढ़ को सीधा रखते हुए किसी भी ध्यानात्मक आसन, सुखासन या फिर कुर्सी पर बैठें. इसके बाद तेजी से नाक के दोनों छिद्रों से सांस को यथासंभव बाहर फेंकें. साथ ही पेट को भी यथासंभव अंदर की ओर संकुचित करें. इसके तुरंत बाद नाक के दोनों छिद्रों से सांस को अंदर खीचतें हैं और पेट को यथासम्भव बाहर आने देते हैं. इस क्रिया को शक्ति व आवश्यकतानुसार 50 बार से धीरे-धीरे बढ़ाते हुए 500 बार तक कर सकते हैं लेकिन एक क्रम में 50 बार से अधिक न करें. क्रम धीरे-धीरे बढ़ाएं. इसे कम से कम 5 मिनट और अधिकतम 30 मिनट तक कर सकते हैं.

कपालभाति के फायदे
ब्लड सर्कुलेशन अच्छा होता है
सांस संबंधी बीमारियों को दूर करमे में मदद मिलती है. विशेष रूप से अस्थमा के पेशेंट्स को खास लाभ होता है
महिलाओं के लिए बहुत लाभकारी
पेट की चर्बी को कम करता है
पेट संबंधी रोगों और कब्ज की परेशानी दूर होती है
रात को नींद अच्छी आती है



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स्वास्थ्य

देश के इन 3 शहरों में थम रहा है कोरोना का कहर, लेकिन वैज्ञानिकों ने दी ये चेतावनी

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नई दिल्ली: हाल ही में आए एक अध्ययन में पता चला है कि कोविड-19 के आर-वैल्यू या रिप्रोडक्टिव वैल्यू में दिल्ली, मुंबई और चेन्नई में गिरावट आई है जो दर्शाती है कि देश के तीन बड़े शहरों में इस महामारी का कहर थमने की राह पर है.

हालांकि, विशेषज्ञों ने चेतावनी भी दी है कि इस स्तर पर आकर अगर लापरवाही की गई तो संक्रमण फिर से बढ़ सकता है. इस बीच ‘स्टैटिस्टिक्स एंड एप्लिकेशंस’ पत्रिका में प्रकाशित ताजा आर-वैल्यू कुछ इस प्रकार हैं. दिल्ली में यह 0.66, मुंबई में 0.81 और चेन्नई में 0.86 है जो राष्ट्रीय औसत 1.16 से काफी कम है.

आर-वैल्यू का अर्थ है, एक संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आकर औसतन संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या. फिलहाल देश में सबसे ज्यादा आर-वैल्यू 1.48 आंध्र प्रदेश की है.

दिल्ली के 0.66 आर-वैल्यू को और बेहतर तरीके से समझाते हुए इस अध्ययन का नेतृत्व करने वाली चेन्नई के गणितीय विज्ञान संस्थान में भौतिकी की प्रोफेसर सीताभ्रा सिन्हा ने बताया, इसका अर्थ है कि राष्ट्रीय राजधानी में कोरोना वायरस से संक्रमित किन्हीं 100 लोगों का समूह औसतन 60 लोगों को यह संक्रमण दे सकता है.

भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, कोलकाता में भौतिकी के प्रोफेसर दिव्येन्दु नंदी ने कहा ‘समुदाय में आर-वैल्यू का इतना कम बने रहने का अर्थ है कि महामारी का मौजूदा कहर थम रहा है और इसे नियंत्रित करने वाले उपायों की मदद से निकट भविष्य में काबू किया जा सकता है.’

उन्होंने बताया कि सामान्य तरीके से समझें तो, अगर आर-वैल्यू एक से कम है तो इसका सीधा मतलब है कि एक संक्रमित व्यक्ति ज्यादा से ज्यादा एक अन्य व्यक्ति को संक्रमित कर रहा है.

महामारी के ‘पूर्ण उन्मूलन’ तक फिलहाल जारी पाबंदियों को लागू रखने पर जोर देते हुए नंदी ने कहा, ‘हमें अपनी सावधानी नहीं छोड़नी चाहिए.’

हरियाणा के अशोक विश्वविद्यालय में प्रोफेसर गौतम मेनन ने कहा, सामान्य भाषा में कहें तो आर-वैल्यू इसकी गिनती करता है कि औसतन कितने लोग एक संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से बीमारी का शिकार हो सकते हैं.

उनका मानना है कि रोजाना के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, दिल्ली, चेन्नई, मुंबई में यह दिख रहा है कि महामारी का कहर थमने लगा है.

मेनन का कहना है कि शहरों में हो रहे सीरो-सर्वे से पता चलता है कि मुंबई और दिल्ली के करीब 40 प्रतिशत या उससे ज्यादा निवासी इस वायरस से संक्रमित हो चुके हैं.

मेनन ने कहा, ‘दूसरे देशों से हमने जो देखा/सीखा है, उससे पता चला है कि समुदाय के स्तर पर किसी बीमारी विशेष के प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने के लिए आबादी के कम से कम 20 प्रतिशत का संक्रमित होना आवश्यक है.’

उन्होंने कहा, ‘ऐसे में, यह सच है कि कहर थम रहा है, लेकिन अगर हम सतर्क नहीं रहे और एहतियात छोड़ा तो यह फिर बढ़ सकता है.’

दिल्ली में रविवार को कोविड-19 के 961 नए मामले आने के साथ ही अभी तक कोरोना वायरस से संक्रमित हुए लोगों की संख्या बढ़कर 1,37,677 हो गयी है. इनमें से कुल 1,23,317 लोग इलाज के बाद संक्रमण मुक्त हो चुके हैं. शहर में एक दिन में सबसे ज्यादा 23 जून को 3,947 नए मामले सामने आए थे.

मुंबई शहर में रविवार को 1,105 नए मामले आए हैं. शहर में अभी तक 1,16,436 लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हो गई है. शहर में पिछले दो महीने में एक दिन में सबसे कम 717 नए मामले 28 जुलाई को आए.

चेन्नई में आज 1,065 नए मामले सामने आए हैं. शहर में अभी तक 1.01 लोग संक्रमित हुए हैं.

(इनपुट: भाषा )

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50 की उम्र के बाद लें ज्‍यादा प्रोटीन, मांसपेशियां रहेंगी मजबूत

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उम्र बढ़ने से आपकी मांसपेशियों (Muscles) की ताकत कम हो जाती है, इसलिए बढ़ती उम्र के साथ आहार (Diet) में ज्यादा प्रोटीन (Protein) शामिल करने की आवश्यकता होती है. बढ़ती उम्र के साथ मांसपेशियों को मजबूत रखने के लिए प्रोटीन की जरूरत को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. एक वयस्क (Adult) यानी 18 से ज्यादा उम्र वाले व्यक्ति के लिए डाइटरी प्रोटीन शरीर के वजन का 0.8 ग्राम प्रति दिन होना चाहिए, लेकिन कुछ अध्ययनों (Studies) से पता चलता है कि 65 साल की आयु के वयस्कों के लिए भी इस पोषक तत्व के उच्च स्तर की आवश्यकता हो सकती है, क्योंकि मांसपेशियां उम्र के साथ अपनी ताकत खो देती हैं. इससे कार्यक्षमता पर असर पड़ता है. अगर सार्कोपेनिया से पीड़ित हैं, तो स्थिति और खराब हो जाती है, जिससे मांसपेशियों में नुकसान होता है.

उम्र बढ़ने के साथ-साथ मांसपेशियां कमजोर होना शुरू हो जाती हैं. इस अवस्था को सार्कोपेनिया कहा जाता है. myUpchar के डॉ. लक्ष्मीदत्ता शुक्ला का कहना है कि शरीर के लिए प्रोटीन बहुत जरूरी होता है और शरीर में मौजूद हर जीवित कोशिका को प्रोटीन की जरूरत होती है. यह मुख्य रूप से एमिनो एसिड से बने होते हैं और कोशिकाओं को एनर्जी देते हैं. सुबह के नाश्ते और दोपहर के खाने में संतुलित मात्रा में प्रोटीन लेना लाभदायक हो सकता है. इससे उम्र बढ़ने के साथ बुजुर्ग लोगों की मांसपेशियों को मजबूत रखने में मदद मिलती है.

यह पाया गया है कि बुजुर्गों का शरीर प्रोटीन में कम मात्रा में मौजूद अमीनो एसिड को बहुत कम रिस्पॉन्ड करता है. ये एसिड  मांसपेशियों के स्वास्थ्य को सुनिश्चित करते हैं. अरकंसास यूनिवर्सिटी में किए गए एक शोध में पता चला है कि इस चुनौती को बुजुर्गों में प्रोटीन का सेवन बढ़ाकर दूर किया जा सकता है. अध्ययन के अनुसार प्रोटीन उनके कुल कैलोरी सेवन का 30-35 प्रतिशत होना चाहिए. दूसरी ओर सार्कोपेनिया से पीड़ित एक वयस्क को प्रति दिन 25 से 30  ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है अगर उसके शरीर का वजन 81 किलोग्राम है.जहां प्रोटीन की मात्रा महत्वपूर्ण है, वहीं इस पोषक तत्व का सही वर्जन चुनना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. ल्यूसीन नाम के एमिनो एसिड को चुनें. इसके लिए सबसे अच्छा स्रोत मछली, अंडे, दूध और डेयरी उत्पाद हैं. इसे सोयाबीन, अन्य बीन्स, नट्स और बीजों से भी प्राप्त कर सकते हैं. ये हाई प्रोटीन फूड्स शामिल कर सकते हैं.

फलियां
ये सब्जियों का वह वर्ग है, जिसमें बीन्स, मटर और दाल शामिल हैं. वे सबसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों में से हैं और प्रोटीन का भी एक अच्छा स्रोत हैं. विशेष रूप से शाकाहारियों के लिए फलियां मीट का एक स्वस्थ विकल्प हो सकती हैं, जिसमें वसा और कोलेस्ट्रॉल अधिक होता है.

सैल्मन मछली

सैल्मन मछली ओमेगा-3 फैटी एसिड और प्रोटीन का बेहतर स्त्रोत है. इसमें लो फैट होता है. यह सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है. मछली में विभिन्न प्रकार के विटामिन, मिनरल्स और कई अन्य पोषक तत्व मौजूद होते हैं. इसलिए मछली का सेवन शरीर की कई जरूरतों को पूरा करता है.

अंडे
एक अंडे में औसतन लगभग 6-7 ग्राम प्रोटीन होता है. हालांकि बहुत से लोग सोचते हैं कि प्रोटीन केवल अंडे की सफेदी में पाया जाता है, लेकिन अंडे की जर्दी ऐसी होती है जहां लगभग सभी पोषक तत्व और वसा पाए जाते हैं. अंडा प्रोटीन के अलावा कैल्शियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड का भी स्त्रोत है.

ये भी पढ़ें – डेली रुटीन में हो जाती हैं ये गलतियां, सेहत के लिए हैं बेहद बुरी

दही
दही प्रोटीन का एक बेहतरीन स्त्रोत है. प्रोटीन की हर कमी को पूरा करने में दही बहुत प्रभावशाली है. यह व्यक्ति की उम्र बढ़ाने में मददगार है.

कॉटेज चीज
कॉटेज चीज में फैट और कैलोरी कम होती है. प्रोटीन का एक बड़ा स्रोत होने के अलावा, इस प्रकार के चीज में कैल्शियम, फास्फोरस, सेलेनियम, विटामिन बी12 और अन्य आवश्यक पोषक तत्व होते हैं.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, मासपेशियों में दर्द के प्रकार, कारण, बचाव, इलाज और दवा पढ़ें।

न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं। सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है। myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं।



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कोरोना: टेस्‍ट के मामले में भारत ने बनाया अनोखा रिकॉर्ड, जानकर हो जाएंगे हैरान

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नई दिल्ली: देश में कोरोना वायरस की स्थिति को लेकर जानकारी देते हुए केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा कि भारत ने कोविड-19 संबंधी दो करोड़ से अधिक टेस्ट किए हैं जो एक ‘महत्वपूर्ण उपलब्धि’ है.

सरकार ने कहा, ‘संक्रमित लोगों का समय पर पता लगाने और उन्हें समय रहते आइसोलेशन में भेजने और जल्द उपचार शुरू करने की महत्वपूर्ण रणनीति के तहत इस कवायद को अंजाम दिया गया. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने कहा कि दो अगस्त तक कुल 2,02,02,858 नमूनों की जांच की गई, जिनमें 3,81,027 नमूनों की जांच रविवार को हुई.’

भारत में छह जुलाई को जांच की संख्या एक करोड़ का आंकड़ा पार कर गई थी.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि पिछले 24 घंटे में 3,81,027 नमूनों की जांच के साथ ही प्रति 10 लाख (टीपीएम) आबादी पर जांच की संख्या बढ़कर 14,640 हो गई है.

आंकड़ों के अनुसार देश के 24 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने प्रति 10 लाख की आबादी पर राष्ट्रीय औसत से अधिक जांच की हैं. इन राज्यों में महाराष्ट्र, तमिलनाडु, दिल्ली, राजस्थान, जम्मू कश्मीर, कर्नाटक और पंजाब भी शामिल हैं.

मंत्रालय ने कहा, ‘एक महत्वपूर्ण उपलब्धि में भारत ने अब तक कोविड-19 संबंधी 2,02,02,858 जांच की हैं.’

देश में अब 1,348 जांच प्रयोगशालाएं हैं जिनमें 914 सरकारी और 434 निजी प्रयोगशालाएं हैं.

पुणे में राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (एनआईवी) की एकमात्र प्रयोगशाला के साथ कोविड-19 जांच की शुरुआत हुई थी और फिर लॉकडाउन शुरू होने के आसपास तक 100 प्रयोगशालाओं में इसकी जांच शुरू हो चुकी थी, जबकि 23 जून को आईसीएमआर ने 1000वीं जांच प्रयोगशाला को मान्यता प्रदान की थी.

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत में कोविड-19 के 52,972 नए मामले सामने आने के साथ सोमवार को संक्रमण के कुल मामले 18 लाख के आंकड़े को पार कर गए, जबकि संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों की कुल संख्या बढ़कर 11.86 लाख से अधिक हो गई.

सोमवार सुबह आठ बजे जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश में कोरोना वायरस संक्रमण के कुल मामले 18,03,695 हो गए, जबकि कोविड-19 की वजह से 771 और लोगों की मौत के बाद इस महामारी से मरने वालों की संख्या 38,135 हो गई.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने पूर्व में कहा था कि केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों ने कोविड​​-19 संबंधी जांच बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त किया है.

(इनपुट: भाषा )

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