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गठिया की दवा से COVID-19 के बुजुर्ग मरीजों की मौत का जोखिम घट जाता है: अध्ययन

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संधिवात गठिया के उपचार में काम आने वाली दवा कोविड-19 से संक्रमित बुजुर्ग मरीजों के मरने के जोखिम को घटा सकती है, ऐसे में कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में एक नया हथियार मिल जाएगा. एक अध्ययन में ऐसा कहा गया है.

गठिया की दवा से COVID-19 के बुजुर्ग मरीजों की मौत का जोखिम घट जाता है: अध्ययन

फ़ाइल फोटो



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नेचुरल माउथ फ्रेशनर और दांतों के लिए वरदान है दातुन, जानिए इसके फायदे

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आयुर्वेद में नीम के दातून को बहुत फायदेमंद बताया गया है. Image Credit/Youtube

आयुर्वेद में नीम के दातून को बहुत फायदेमंद बताया गया है. Image Credit/Youtube

दांतों को साफ (Clean Teeth) करने के लिए बहुत से लोग आज भी दातुन (Datun) का इस्‍तेमाल करना पसंद करते हैं. औषधीय गुणों (Medicinal Properties) से भरपूर दातून के बहुत से फायदे हैं.


  • News18Hindi

  • Last Updated:
    November 24, 2020, 10:08 AM IST

भारत में प्राचीन काल से ही दांतों को साफ  (Clean Teeth) करने के लिए कई परंपरागत तरीके अपनाए जाते हैं. इसी में से एक दातुन (Datun) का इस्‍तेमाल भी है. दातुन किसी खास तरह के पेड़ की पतली टहनी से बना होता है. वैसे तो इसके लिए कई तरह के पेड़ों की टहनियां इस्‍तेमाल की जा सकती हैं, मगर नीम, बेर और बबूल आदि के दातून काफी फायदेमंद माने जाते हैं. वैसे तो आजकल दांतों को मजबूत बनाए रखने का दावा करने वाले कई अच्‍छे टूथपेस्ट और हर्बल टूथपेस्‍ट भी मिल जाते हैं, मगर औषधीय गुणों (Medicinal Properties) से भरपूर दातून के अलग ही फायदे हैं. दातून से एक फायदा यह भी होता है कि इससे आप अपने दांतों के साथ अपनी जीभ भी साफ कर सकते हैं. ऐसे में आप भी जानिए कि कौन से दातून खास हैं और इनके क्‍या फायदे हैं.

नीम का दातून
दातून का इस्‍तेमाल पुराने समय से ही किया जाता रहा है. आयुर्वेद में नीम के दातून को बहुत फायदेमंद बताया गया है. माना जाता है कि दातून से दांत तो साफ और स्‍वस्‍थ रहते ही हैं, इसके इस्‍तेमाल से पाचन क्रिया भी दुरुस्‍त रहती है.

बेर का दातुनमाना जाता है कि नीम की तरह बेर के पेड़ की टहनी से बना दातून भी जहां दांतों के लिए फायदेमंद होता है, वहीं इससे गले की खराश आदि भी दूर होती है और आवाज साफ होती है.

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बबूल का दातुन
नीम और बेर के दातून के अलावा लोग बबूल की टहनी से बने दातून को भी इस्‍तेमाल करना पसंद करते हैं. इसके पीछे माना जाता है कि बबूल का दातुन मसूड़ों को भी स्‍वच्‍छ रखता है और दांतों को मजबूती देता है.

दातुन करने के फायदे
दातून करने के कई फायदे होते हैं. माना जाता है कि अगर आप नियमित तौर पर दातुन करते हैं तो दांतों में कीड़ा नहीं लगता. इसके पीछे वजह यह है कि दातुन पूरी तरह से प्राकृतिक औेर किटाणुनाशक होता है और इससे अच्‍छी तरह से दांत और जीभ अंदर तक साफ हो जाते हैं. ऐसे में दांतों का कीड़ों से बचाव रहता है.

मसूड़े मजबूत बनते हैं
नीम के दातुन को सबसे अच्‍छा माना जाता है. इसके पीछे वजह यह है कि नीम के दातुन से नियमित तौर पर दांत साफ करने से मसूड़ों को मजबूती मिलती है और दांत साफ रहते हैं.

दांतों की समस्‍याएं होंगी दूर
आज की बदलते लाइफस्‍टाइल में कुछ भी और कभी भी खा लेना दांतों को नुकसान पहुंचा रहा है. ऐसे में दांतों में कई तरह की दिक्‍कतें हो रही हैं. ऐसे में पायरिया की समस्या भी होना आम हो गया है. मगर दातून के इस्‍तेमाल से इस समस्‍या से बचाव रहता है.

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नेचुरल माउथ फ्रेशनर है
इसके अलावा दातुन नेचुरल माउथफ्रेशनर भी है. खासतौर पर नीम का दातुन मुंह से आने वाली दुर्गंध का नाश करता है. जिन लोगों को मुंह से दुर्गंध आती है, उनके लिए दातुन बहुत फायदेमंद रहता है. इसके लिए सुबह और रात में सोने से पहले दातुन करना फायदेमंद रहता है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)



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जानें सेप्टिक गठिया के लक्षण और उपचार के बारे में

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नई दिल्लीः आजकल बदलते लाइफस्टाइल के कारण लोग गठिया (Arthritis) रोग के शिकार हो रहे हैं. इन्हीं में से एक सेप्टिक गठिया (Septic Arthiritis), जो किसी संक्रमण की तरह ही फैलता है. यह ज्यादातर उन लोगों में होता है, जिन्हें कोई चोट (Injury) लगी हो या सर्जरी कराई हो या इंजेक्शन (Injection) लगवाया हो, क्योंकि इन सभी के माध्यम से ही संक्रमण जोड़ों में फैलता है, इसलिए इसे संक्रामक गठिया भी कहा जाता है. 

सेप्टिक गठिया के लक्षण और उपचार 

बता दें कि सभी आयु वर्ग में सेप्टिक गठिया के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं और कुछ लक्षण एक जैसे भी हो सकते हैं, लेकिन इस बीमारी के सभी सामान्य लक्षणों में जोड़ों में सूजन, दर्द, जोड़ों पर लालिमा, बुखार, ठंड महसूस करना आदि शामिल है.

इसके अन्य लक्षणों में अधिक कमजोरी महसूस करना, गैस एसिडिटी की समस्या और त्वचा पर झुर्रियां आदि शामिल हैं. सेप्टिक गठिया में कंधे, घुटना, कलाई, कोहनी, कमर आदि अंग प्रभावित होते हैं. इस इन्फेक्शन के संपर्क में आने पर व्यक्ति कुछ ही समय बाद इन लक्षणों को महसूस करने लगता है. 

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सेप्टिक गठिया रोग संक्रमण की वजह से फैलता है जबकि ‘एक्यूट आर्थराइटिस डिजीज’ तब विकसित हो सकता है जब बैक्टीरिया या अन्य रोग पैदा करने वाले सूक्ष्म जीव खून के माध्यम से जोड़ों में फैल जाते हैं या जब जोड़ सीधे किसी चोट या सर्जरी के माध्यम से सूक्ष्मजीव से संक्रमित हो जाते हैं. 

सेप्टिक गठिया इंफेक्शन के कारण होता है. जब इंफेक्शन दूर हो जाता है तो यह स्थिति ठीक हो जाती है, लेकिन इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, अन्यथा जोड़ों में दर्द की समस्या बढ़ सकती है. सेप्टिक गठिया को ठीक होने में एक सप्ताह का समय लग सकता है. इस इन्फेक्शन को दूर करने के लिए डॉक्टर रोगी को कुछ एंटीबायोटिक दवाएं दे सकते हैं.

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(नोट: कोई भी उपाय अपनाने से पहले डॉक्टर्स की सलाह जरूर लें)



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मेंटल हेल्थ के लिए खतरनाक है ‘निगेटिव सेल्फ टॉक’, जानिए कैसे पाएं छुटकारा

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हेल्दी शरीर के लिए जरूरी है हेल्दी माइंड (Mental Health) और हेल्दी माइंड के लिए जरूरी है निगेटिव सोच (Negative Think) से छुटकारा पाना. शारीरिक रूप से फिट रहने के लिए जितना शरीर से फिट रहना जरूरी है, उतना ही जरूरी है मेंटली फिट रहना. आप जितना मेंटली फिट रहेंगे आपकी लाइफस्टाइल (Lifestyle) भी उतनी ही बेहतर होगी. इसलिए जरूरी है कि अपनी मेंटल हेल्थ पर शारीरिक सेहत (Physical Health) जितना ही ध्यान दिया जाए.

क्या होती है निगेटिव सेल्फ टॉक
हम अपने जीवन में आलोचनाओं से गुजरते हैं, कभी किसी की आलोचना करते हैं, तो कभी आलोचनाएं सुनते हैं, लेकिन किसी के लिए लगातार आलोचनाओं को सुनना भी समस्या पैदा कर सकता है. बात करें निगेटिव सेल्फ टॉक की, तो इसमें एक व्यक्ति हर बात को आलोचनात्मक दृष्टिकोण से ही देखने लग जाता है और यह आलोचना भी हमेशा नकारात्मक रूप में होती है. इसका मुख्य कारण है फेल होने का डर. इसलिए अपने आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए इसे ठीक करना बहुत जरूरी है.

निगेटिव सेल्फ टॉक के उदाहरणनिगेटिव सेल्फ टॉक की पहचान करना कई बार मुश्किल हो जाता है, क्योंकि इसके तरीके कई बार ऐसे होते हैं जो समझ ही नहीं आते हैं. जब हम खुद से सवाल करते हुए कहते हैं कि ‘मैं इस चीज में अच्छा नहीं हूं इसलिए मुझे यह काम नहीं करना चाहिए’ भी एक तरह से निगेटिव सोच को पैदा करता है.

निगेटिव सोच से ऐसे पाएं छुटकारा
शुरुआती तौर पर इससे छुटकारा पाना आसान नहीं होगा, लेकिन लगातार प्रयास से इससे छुटकारा पाया जा सकता है. सबसे पहले तो ऐसे निगेटिव सोच की पहचान करना सीखें और उन पर ध्यान देने से बचें. थोड़ा समय देकर आप खुद इनसे निपटने का तरीका ढ़ूंढ़ पाएंगे क्योंकि आपकी सोच को आपसे बेहतर कोई और नहीं समझ सकता है. आइए जानते हैं कुछ और ट्रिक्स जिनका प्रयोग करके आप निगेटिव सोच को दूर भगाने में कर सकते हैं-

1. खुद से एक दोस्त की तरह बर्ताव करें
जब भी आपके मन में निगेटिव सोच पैदा हो खुद को एक दोस्त की तरह सलाह देने की कोशिश करें कि इस तरह की स्थिति में आप अपने दोस्त को किस तरह की सलाह देते और उसी उपाय को खुद पर लागू करने की कोशिश करें. आप अपने किसी दोस्त से भी इस बारे में सलाह ले सकते हैं.

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2. अपने अंदर की निगेटिविटी को पहचानें
अपने अंदर की निगेटिविटी को पहचानना उसे खत्म करने का पहला कदम है. अक्सर हमारी निगेटिव सोच का पैटर्न एक जैसा ही होता है, हम चीजों को हमेशा एक तरह से ही नकारते हैं इसलिए जरूरी है कि खुद को समझें, खुद को पढ़ें और अंदर की निगेटिविटी को दूर करें.

3. निगेटिव सोच आने पर खुद से बात करें
जब भी आपके अंदर निगेटिव सोच आए आप खुद से बात करना शुरू कर दें, खुद को समझाएं कि यह सच नहीं सिर्फ मन के विचार हैं. बोल बोलकर खुद को समझाएं कि यह रियल नहीं है और आप इससे लड़ने में सक्षम हैं. शुरुआत में यह तरीका थोड़ा अजीब लगेगा, लेकिन यदि यह काम कर गया तो आपके मन से निगेटिविटी भगाने के यह सबसे अच्छा तरीका बन सकता है.

4. लिखना शुरू करें
अगर कोई तरीका काम न करे या निगेटिव सोच से छुटकारा न मिले तो अपनी सारी निगेटिव सोच को एक पेपर पर लिखना शुरू कर दें. लिखकर आप चीजों को एक तरह से अपने दिमाग से बाहर निकाल सकते हैं.

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5. खुद से पॉजिटिव बातें करना शुरू करें
निगेटिविटी तभी खत्म होगी जब आप चीजों को लेकर पाजिटिव सोचना शुरू करेंगे. खुद को मोटिवेट करते रहें, अपने आप को यह यकीन दिलाएं कि जो भी काम आप कर रहे हैं या करने जा रहे हैं उसमें आप जरूर सफल होंगे. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबधित विशेषज्ञ से संपर्क करें)



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