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COVID-19: चौबीस घंटे के भीतर दिल्ली के इस अस्पताल में नहीं हुई एक भी मौत, मुख्यमंत्री ने दी जानकारी

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नई दिल्ली: एक राहत भरी खबर दिल्ली से आ रही है. कोरोना वायरस (Coronavirus) महामारी के बीच दिल्ली के एनएनजेपी अस्पताल में चौबीस घंटे के भीतर एक भी मौत नहीं हुई है. इस बीच दिल्ली में कोरोना वायरस से ठीक होने की दर (Recovery Rate) 88% से ज्यादा हो गई है. खुद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस बात की जानकारी दी है. बताते चलें कि मंगलवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में चौबीस घंटे के भीतर कोरोना वायरस के मात्र 1,065 पॉजिटिव मामले ही सामने आए थे.

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को ट्विटर पर घोषणा की, ‘‘कल हमारे सबसे बड़े कोविड अस्पताल एलएनजेपी में कोई मौत नहीं हुई.’’ अस्पताल के चिकित्सा निदेशक सुरेश कुमार ने कहा, ‘‘पिछले कुछ महीनों में कोविड-19 के कारण कम से कम एक मौत प्रतिदिन दर्ज की गई, लेकिन कल एलएनजेपी में कोई भी मौत नहीं हुई.’’ उन्होंने कहा कि मंगलवार शाम तक अस्पताल के 2,000 बेड में से 389 पर कोविड-19 के रोगी भर्ती हैं, जिनमें से 88 आईसीयू में हैं और दो वेंटिलेटर पर हैं.

 

दिल्ली में मंगलवार को कोरोना वायरस के 1,056 नये मामले सामने आने के बाद कोविड-19 से संक्रमित लोगों की कुल संख्या 1.32 लाख से अधिक पहुंच गई जबकि मृतकों की संख्या बढ़कर 3,881 हो गई है. एलएनजेपी अस्पताल में सोमवार को इस बीमारी के कारण किसी भी मरीज की मौत नहीं हुई. ऐसा पिछले कुछ महीनों में पहली बार हुआ है कि संक्रमण के कारण किसी मरीज की जान नहीं गई.

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दिल्ली सरकार ने लोकनायक जयप्रकाश अस्पताल को कोविड-19 मामलों के लिए विशेष रूप से निर्धारित किया गया है. दिल्ली स्वास्थ्य विभाग के एक बुलेटिन के अनुसार, कोविड-19 के मामलों की संख्या बढ़कर 1,32,275 हो गई हैं, जबकि इस महामारी से 28 लोगों की मौत होने से मृतकों की संख्या बढ़कर 3,881 हो गई. बुलेटिन के अनुसार, इस समय 10,887 मरीजों का इलाज चल रहा है.

 



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काम करने या फैसले लेने में हो रही है उलझन? सेकंड हैंड स्ट्रेस का शिकार तो नहीं आप

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तनाव यानी स्ट्रेस (Depression Or Stress) किसी भी तरह से स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है, लेकिन लोगों को अब सेकंड हैंड स्ट्रेस से भी खुद को बचाना होगा. सेकंड हैंड स्मोक (कोई धूम्रपान करे और नुकसान दूसरों को हो) की तरह सेकंड हैंड स्ट्रेस भी खतरनाक है. सेकंड हैंड स्ट्रेस का मतलब है कि व्यक्ति खुद तनाव नहीं लेता है बल्कि दूसरों से तनाव उसे मिलता है. यह उसका पति या पत्नी, परिवार का कोई सदस्य, सहकर्मी या ऐसा व्यक्ति जो बहुत करीब हो, वह हो सकता है. स्पष्ट है कि तनाव से भरे नकारात्मक मानसिकता वाले लोगों के बीच रहने से अन्य व्यक्ति भी तनाव का शिकार हो सकता है. ऐसे लोग अपना तनाव बाहर निकालते हैं और सामने वाले को भी इससे ग्रसित कर देते हैं. जब व्यक्ति किसी और के तनाव का हिस्सा बन जाता है तो वह सेकंड हैंड स्ट्रेस का शिकार कहलाता है.

myUpchar से जुड़े एम्स के डॉ. उमर अफरोज का कहना है कि आजकल ऐसे व्यक्ति की कल्पना करना असंभव है जो मानसिक तनाव का अनुभव ना कर रहा हो. फिर चाहे व्यक्तिगत, सामाजिक या आर्थिक समस्या ही क्यों ना हो. मानसिक तनाव तन और मन, दोनों पर बुरा असर डालता है जिससे कई शारीरिक और मानसिक बीमारियां जन्म लेती हैं. दुखद तो यह है कि वे खुद ये नहीं जानते कि इस तनाव से कैसे बचना है. इसके कारण स्थिति और भी बिगड़ जाती है. इसलिए व्यक्ति को सेकंड हैंड स्ट्रेस के लक्षणों और संकेतों की जानकारी होने चाहिए ताकि मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षित रहे.

बिना कारण तनाव से घिरे रहना:सामान्य तनाव की स्थिति में व्यक्ति उसके पीछे का कारण जानता है. चूंकि सेकंड हैंड स्ट्रेस मस्तिष्क से नहीं उपजा है तो व्यक्ति को पता नहीं होता है कि आखिरी तनाव क्यों हो रहा है और कहां से आया है. इसका नर्वस सिस्टम पर तुरंत असर पड़ता है और मरीज का किसी काम में मन नहीं लगता है.

निराशावादी और भ्रमित

अगर कोई व्यक्ति हमेशा सकारात्मक सोच रखता है और आशान्वित रहता है, लेकिन उसे अपने आसपास हो रही चीजों से निराशा महसूस होने लगे तो समझ जाइए कि सेकंड हैंड स्ट्रेस का शिकार हो सकता है.

हमेशा थकान का अनुभव

अगर व्यक्ति उन लोगों में से है जो कि पहले खुश रहा करते थे, लेकिन इन दिनों उन लोगों के साथ रह रहे हैं जो कि हमेशा तनाव में रहते हैं, किसी न किसी चीज की शिकायत करते रहते हैं तो यह उनकी एनर्जी को भी प्रभावित कर सकता है. ऐसी परिस्थिति में व्यक्ति हमेशा थका हुआ महसूस करता है जो कि समय के साथ उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है और यह सेकंड हैंड स्ट्रेस का संकेत है. इसलिए नकारात्मक लोगों से दूर रहें.

ब्रेन फॉग का शिकार

अगर चीजे भूलने लगे हैं, याददाश्त कमजोर हो रही है, ब्रेन फॉग (ऐसी बीमारी जिसमें सोचने की क्षमता प्रभावित हो जाती है और व्यक्ति हमेशा कन्फ्यूज महसूस करते हैं) के शिकार हो रहे हैं तो सेकंड हैंड स्ट्रेस का संकेत भी हो सकता है. myUpchar से जुड़े एम्स के डॉ. नबी वली का कहना है कि कमजोर याद्दाश्त में तनाव और अवसाद प्रमुख भूमिका निभा सकते हैं. यह भी आशंका है कि तनाव मस्तिष्क में किसी विशेष मेमोरी के स्टोरेज की प्रक्रिया में दखल करता है. यदि व्यक्तिगत जीवन में समस्या नहीं है, तो यह करीबी लोगों द्वारा दिए गए सेकंड हैंड तनाव के कारण हो सकता है.

ठीक से सोचने और निर्णय लेने में असमर्थ

अगर काम के बारे में सोचने या निर्णय लेने में कठिनाई हो रही है, तो यह सेकंड हैंड स्ट्रेस भी हो सकता है. सेकंड हैंड स्ट्रेस व्यक्ति की उत्पादकता को प्रभावित कर सकता है. ऐसी स्थिति में अपना काम पूरा करने में खुशी नहीं मिलती है और यह उसके लिए मुश्किल काम बन सकता है. (अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, तुलसी के पत्ते से लेकर लैवेंडर तेल और अश्वगंधा तक तनाव दूर करने के घरेलू उपाय पढ़ें।) (न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं। सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है। myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं।)



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देश के इन 3 शहरों में थम रहा है कोरोना का कहर, लेकिन वैज्ञानिकों ने दी ये चेतावनी

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नई दिल्ली: हाल ही में आए एक अध्ययन में पता चला है कि कोविड-19 के आर-वैल्यू या रिप्रोडक्टिव वैल्यू में दिल्ली, मुंबई और चेन्नई में गिरावट आई है जो दर्शाती है कि देश के तीन बड़े शहरों में इस महामारी का कहर थमने की राह पर है.

हालांकि, विशेषज्ञों ने चेतावनी भी दी है कि इस स्तर पर आकर अगर लापरवाही की गई तो संक्रमण फिर से बढ़ सकता है. इस बीच ‘स्टैटिस्टिक्स एंड एप्लिकेशंस’ पत्रिका में प्रकाशित ताजा आर-वैल्यू कुछ इस प्रकार हैं. दिल्ली में यह 0.66, मुंबई में 0.81 और चेन्नई में 0.86 है जो राष्ट्रीय औसत 1.16 से काफी कम है.

आर-वैल्यू का अर्थ है, एक संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आकर औसतन संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या. फिलहाल देश में सबसे ज्यादा आर-वैल्यू 1.48 आंध्र प्रदेश की है.

दिल्ली के 0.66 आर-वैल्यू को और बेहतर तरीके से समझाते हुए इस अध्ययन का नेतृत्व करने वाली चेन्नई के गणितीय विज्ञान संस्थान में भौतिकी की प्रोफेसर सीताभ्रा सिन्हा ने बताया, इसका अर्थ है कि राष्ट्रीय राजधानी में कोरोना वायरस से संक्रमित किन्हीं 100 लोगों का समूह औसतन 60 लोगों को यह संक्रमण दे सकता है.

भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, कोलकाता में भौतिकी के प्रोफेसर दिव्येन्दु नंदी ने कहा ‘समुदाय में आर-वैल्यू का इतना कम बने रहने का अर्थ है कि महामारी का मौजूदा कहर थम रहा है और इसे नियंत्रित करने वाले उपायों की मदद से निकट भविष्य में काबू किया जा सकता है.’

उन्होंने बताया कि सामान्य तरीके से समझें तो, अगर आर-वैल्यू एक से कम है तो इसका सीधा मतलब है कि एक संक्रमित व्यक्ति ज्यादा से ज्यादा एक अन्य व्यक्ति को संक्रमित कर रहा है.

महामारी के ‘पूर्ण उन्मूलन’ तक फिलहाल जारी पाबंदियों को लागू रखने पर जोर देते हुए नंदी ने कहा, ‘हमें अपनी सावधानी नहीं छोड़नी चाहिए.’

हरियाणा के अशोक विश्वविद्यालय में प्रोफेसर गौतम मेनन ने कहा, सामान्य भाषा में कहें तो आर-वैल्यू इसकी गिनती करता है कि औसतन कितने लोग एक संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से बीमारी का शिकार हो सकते हैं.

उनका मानना है कि रोजाना के आंकड़ों के विश्लेषण के अनुसार, दिल्ली, चेन्नई, मुंबई में यह दिख रहा है कि महामारी का कहर थमने लगा है.

मेनन का कहना है कि शहरों में हो रहे सीरो-सर्वे से पता चलता है कि मुंबई और दिल्ली के करीब 40 प्रतिशत या उससे ज्यादा निवासी इस वायरस से संक्रमित हो चुके हैं.

मेनन ने कहा, ‘दूसरे देशों से हमने जो देखा/सीखा है, उससे पता चला है कि समुदाय के स्तर पर किसी बीमारी विशेष के प्रति रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित होने के लिए आबादी के कम से कम 20 प्रतिशत का संक्रमित होना आवश्यक है.’

उन्होंने कहा, ‘ऐसे में, यह सच है कि कहर थम रहा है, लेकिन अगर हम सतर्क नहीं रहे और एहतियात छोड़ा तो यह फिर बढ़ सकता है.’

दिल्ली में रविवार को कोविड-19 के 961 नए मामले आने के साथ ही अभी तक कोरोना वायरस से संक्रमित हुए लोगों की संख्या बढ़कर 1,37,677 हो गयी है. इनमें से कुल 1,23,317 लोग इलाज के बाद संक्रमण मुक्त हो चुके हैं. शहर में एक दिन में सबसे ज्यादा 23 जून को 3,947 नए मामले सामने आए थे.

मुंबई शहर में रविवार को 1,105 नए मामले आए हैं. शहर में अभी तक 1,16,436 लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हो गई है. शहर में पिछले दो महीने में एक दिन में सबसे कम 717 नए मामले 28 जुलाई को आए.

चेन्नई में आज 1,065 नए मामले सामने आए हैं. शहर में अभी तक 1.01 लोग संक्रमित हुए हैं.

(इनपुट: भाषा )

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50 की उम्र के बाद लें ज्‍यादा प्रोटीन, मांसपेशियां रहेंगी मजबूत

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उम्र बढ़ने से आपकी मांसपेशियों (Muscles) की ताकत कम हो जाती है, इसलिए बढ़ती उम्र के साथ आहार (Diet) में ज्यादा प्रोटीन (Protein) शामिल करने की आवश्यकता होती है. बढ़ती उम्र के साथ मांसपेशियों को मजबूत रखने के लिए प्रोटीन की जरूरत को बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है. एक वयस्क (Adult) यानी 18 से ज्यादा उम्र वाले व्यक्ति के लिए डाइटरी प्रोटीन शरीर के वजन का 0.8 ग्राम प्रति दिन होना चाहिए, लेकिन कुछ अध्ययनों (Studies) से पता चलता है कि 65 साल की आयु के वयस्कों के लिए भी इस पोषक तत्व के उच्च स्तर की आवश्यकता हो सकती है, क्योंकि मांसपेशियां उम्र के साथ अपनी ताकत खो देती हैं. इससे कार्यक्षमता पर असर पड़ता है. अगर सार्कोपेनिया से पीड़ित हैं, तो स्थिति और खराब हो जाती है, जिससे मांसपेशियों में नुकसान होता है.

उम्र बढ़ने के साथ-साथ मांसपेशियां कमजोर होना शुरू हो जाती हैं. इस अवस्था को सार्कोपेनिया कहा जाता है. myUpchar के डॉ. लक्ष्मीदत्ता शुक्ला का कहना है कि शरीर के लिए प्रोटीन बहुत जरूरी होता है और शरीर में मौजूद हर जीवित कोशिका को प्रोटीन की जरूरत होती है. यह मुख्य रूप से एमिनो एसिड से बने होते हैं और कोशिकाओं को एनर्जी देते हैं. सुबह के नाश्ते और दोपहर के खाने में संतुलित मात्रा में प्रोटीन लेना लाभदायक हो सकता है. इससे उम्र बढ़ने के साथ बुजुर्ग लोगों की मांसपेशियों को मजबूत रखने में मदद मिलती है.

यह पाया गया है कि बुजुर्गों का शरीर प्रोटीन में कम मात्रा में मौजूद अमीनो एसिड को बहुत कम रिस्पॉन्ड करता है. ये एसिड  मांसपेशियों के स्वास्थ्य को सुनिश्चित करते हैं. अरकंसास यूनिवर्सिटी में किए गए एक शोध में पता चला है कि इस चुनौती को बुजुर्गों में प्रोटीन का सेवन बढ़ाकर दूर किया जा सकता है. अध्ययन के अनुसार प्रोटीन उनके कुल कैलोरी सेवन का 30-35 प्रतिशत होना चाहिए. दूसरी ओर सार्कोपेनिया से पीड़ित एक वयस्क को प्रति दिन 25 से 30  ग्राम प्रोटीन की आवश्यकता होती है अगर उसके शरीर का वजन 81 किलोग्राम है.जहां प्रोटीन की मात्रा महत्वपूर्ण है, वहीं इस पोषक तत्व का सही वर्जन चुनना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. ल्यूसीन नाम के एमिनो एसिड को चुनें. इसके लिए सबसे अच्छा स्रोत मछली, अंडे, दूध और डेयरी उत्पाद हैं. इसे सोयाबीन, अन्य बीन्स, नट्स और बीजों से भी प्राप्त कर सकते हैं. ये हाई प्रोटीन फूड्स शामिल कर सकते हैं.

फलियां
ये सब्जियों का वह वर्ग है, जिसमें बीन्स, मटर और दाल शामिल हैं. वे सबसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों में से हैं और प्रोटीन का भी एक अच्छा स्रोत हैं. विशेष रूप से शाकाहारियों के लिए फलियां मीट का एक स्वस्थ विकल्प हो सकती हैं, जिसमें वसा और कोलेस्ट्रॉल अधिक होता है.

सैल्मन मछली

सैल्मन मछली ओमेगा-3 फैटी एसिड और प्रोटीन का बेहतर स्त्रोत है. इसमें लो फैट होता है. यह सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है. मछली में विभिन्न प्रकार के विटामिन, मिनरल्स और कई अन्य पोषक तत्व मौजूद होते हैं. इसलिए मछली का सेवन शरीर की कई जरूरतों को पूरा करता है.

अंडे
एक अंडे में औसतन लगभग 6-7 ग्राम प्रोटीन होता है. हालांकि बहुत से लोग सोचते हैं कि प्रोटीन केवल अंडे की सफेदी में पाया जाता है, लेकिन अंडे की जर्दी ऐसी होती है जहां लगभग सभी पोषक तत्व और वसा पाए जाते हैं. अंडा प्रोटीन के अलावा कैल्शियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड का भी स्त्रोत है.

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दही
दही प्रोटीन का एक बेहतरीन स्त्रोत है. प्रोटीन की हर कमी को पूरा करने में दही बहुत प्रभावशाली है. यह व्यक्ति की उम्र बढ़ाने में मददगार है.

कॉटेज चीज
कॉटेज चीज में फैट और कैलोरी कम होती है. प्रोटीन का एक बड़ा स्रोत होने के अलावा, इस प्रकार के चीज में कैल्शियम, फास्फोरस, सेलेनियम, विटामिन बी12 और अन्य आवश्यक पोषक तत्व होते हैं.

अधिक जानकारी के लिए हमारा आर्टिकल, मासपेशियों में दर्द के प्रकार, कारण, बचाव, इलाज और दवा पढ़ें।

न्यूज18 पर स्वास्थ्य संबंधी लेख myUpchar.com द्वारा लिखे जाते हैं। सत्यापित स्वास्थ्य संबंधी खबरों के लिए myUpchar देश का सबसे पहला और बड़ा स्त्रोत है। myUpchar में शोधकर्ता और पत्रकार, डॉक्टरों के साथ मिलकर आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी सभी जानकारियां लेकर आते हैं।



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