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White House में बने रहने का ट्रंप का सपना टूटा, ये आखिरी दांव भी हुआ फेल

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वाशिंगटन : नव निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन (President-elect Joe Biden) से चुनाव हारने के बाद निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की व्हाइट हाउस में बने रहने की उम्मीदें लगभग खत्म हो गईं हैं. ऐसा इसलिए भी कहा जा रहा है क्योंकि हाल ही में चुने रिपब्लिकन सांसदों (Republican lawmakers) ने अपने राज्य के फैसले में बदलाव की किसी भी कोशिश को सिरे से खारिज कर दिया है. 

डोनाल्ड ट्रंप कैंपेन ( Donald Trump’s campaign) के लोग प्रमुख राज्यों में आए नतीजों को बदलवाने की कोशिश कर रहे हैं. और इसी वजह से शुक्रवार को ट्रंप ने मिशिगन के रिपब्लिकन सांसदों से मुलाकात की थी.

ट्रंप का आखिरी दांव!
ट्रंप ने व्हाइट हाउस में सीनेट के बहुमत नेता माइक शिर्के (Mike Shirkey ) और हाउस स्पीकर ली चैटफील्ड (Lee Chatfield ) से मुलाकात की, जिन्होंने कहा कि उनके पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है जो ‘मिशिगन के चुनावी नतीजे को बदल देगी.’

रिपब्लिकन पार्टी का अधिकारिक बयान
रिपब्लिकन के साझा बयान में कहा गया है, ‘हमें अभी तक ऐसी किसी भी जानकारी से अवगत नहीं कराया गया है जिससे मिशिगन का चुनाव परिणाम बदल सके और स्थानीय जनप्रतिनिधि के रूप में हम सभी कानून का पालन करेंगे और सामान्य प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेंगे.’

रिपब्लिकन नेताओं ने ये भी कहा ‘मिशिगन की प्रमाणन प्रक्रिया खतरों और धमकी से मुक्त एक सहज और सामान्य तरीके से होनी चाहिए.’

जॉर्जिया से भी मिली ट्रंप को मायूसी
ट्रम्प को शुक्रवार को एक और झटका मिला जब जॉर्जिया औपचारिक रूप से अपना परिणाम घोषित करने वाला स्टेट बन गया. यानी जॉर्जिया से जारी हुए आखिरी नतीजे में बिडेन के इस राज्य को 12,670 मतों से जीतने का दावा किया गया.

मिशिगन के फैसले को लेकर ट्रंप के बयान के बाद सीनेटर मिट रोमनी समेत कई रिपब्लिकन नेताओं ने उनकी आलोचना की है. उन्होंने कहा है, ‘यह कल्पना भी नहीं की जा सकती है कि किसी निवर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति ने सत्ता पर बने रहने के लिए ऐसे अलोकतांत्रिक काम किया हो.’

सीनेट के अन्य रिपब्लिकन सांसद बेन सासे और जोनी अर्न्स्ट ने भी ट्रम्प की रणनीति को खारिज कर दिया.

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जो बाइडेन ने चुने अपने कैबिनेट के शीर्ष अधिकारी, लैटिन अमेरिकन को बनाया इमिग्रेशन का हेड

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जो बाइडेन ने चुने अपने कैबिनेट के शीर्ष अधिकारी, लैटिन अमेरिकन को बनाया इमिग्रेशन का हेड

जो बाइडेन ने सुरक्षा और विदेश मंत्रालय से जुड़े अपने शीर्ष अधिकारियों की घोषणा की. (फाइल फोटो)

वॉशिंगटन:

अमेरिका के अगले राष्ट्रपति बनने जा रहे डेमोक्रेटिक जो बाइडेन (Joe Biden) ने सोमवार को अपने कैबिनेट (US Cabinet) के शीर्ष पदों के लिए अधिकारियों के नामों की घोषणा कर दी. उन्होंने अपने लंबे समय से रहे विदेशी नीति के सलाहकार एंटनी ब्लिंकेन को विदेश मंत्री बनाया है, वहीं, पूर्व अमेरिकी मुख्य डिप्लोमैट जॉन केरी को अपना विशेष क्लाइमेट राजदूत बनाया है.

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वहीं, बाइडेन ने एक अहम फैसला लेते हुए सबसे पहले-पहले लैटिन अमेरिकन, क्यूबा में जन्म वकील अलेहान्द्रो मायोरकस को डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी का हेड बनाया है. यही डिपार्टमेंट अमेरिका में इमिग्रेशन के मामले देखता है.

उन्होंने ने पूर्व सीआईए डायरेक्टर एवरिल हेन्स को अपना डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलीजेंस बनाया है. एवरिल यह पद संभालने वाली पहली महिला होंगी. अगले अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन ने फेडरल रिजर्व की पूर्व अध्यक्ष जैनेट येलेन को वित्त मंत्री पद के लिए चुना है. येलेन बाइडेन की आर्थिक नीतियों को आकार और दिशा देने में निर्णायक भूमिका निभाएंगी. वित्त विभाग की कमान संभालने वाली वह पहली महिला होंगी. येलेन, बाइडेन की अहम सलाहकार तथा उनके आर्थिक एजेंडे की प्रवक्ता भी होंगी.

यह भी पढ़ें: डोनाल्ड ट्रंप ने आखिरकार दिए व्हाइट हाउस छोड़ने के संकेत, अपने अधिकारियों से बोले- ‘करो जो करना है’

बाइडेन ने यह भी कहा कि वो अनुभवी डिप्लोमैट लिंडा-थॉमस-ग्रीनफील्ड को कैबिनेट के सदस्य का दर्जा देते हुए उन्हें यूनाइटेड नेशंस का दूत बनाएंगे. बाइडेन ने एक ट्वीट करते हुए अपनी नेशनल सिक्योरिटी टीम और फॉरेन पॉलिसी टीम के सदस्यों की घोषणा की थी.

बाइडेन के उपराष्ट्रपति कार्यकाल में उनके सिक्योरिटी सहायक रहे जेक सलिवन को व्हाइट हाउस का नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर बनाया गया है. ये सभी अधिकारी 2009-2017 में ओबामा-बाइडेन प्रशासन का हिस्सा रह चुके हैं और अपने-अपने क्षेत्र में काफी अनुभवी हैं.

Video: जो बाइडेन की जीत से खुश हैं US में रहने वाले भारतीय

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‘COVID-19 रोकने में प्रभावी है ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की ये वैक्सीन’

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लंदन: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित किये जा रहे कोविड-19 के टीके के तीसरे चरण के परीक्षण के अंतरिम परिणाम सोमवार को प्रस्तुत किये गए जिसमें यह संक्रमण की रोकथाम में ‘प्रभावी’ पाया गया है. एस्ट्राजेनेका कंपनी की मदद से टीके का विकास किया जा रहा है. दो बार की खुराक के सामूहिक आंकड़ों को देखें तो टीके का प्रभाव 70.4 प्रतिशत देखा गया. वहीं दो अलग-अलग खुराकों में इसका प्रभाव एक बार 90 प्रतिशत और दूसरी बार 62 प्रतिशत रहा.

शुरुआती संकेतों से लगता है कि यह टीका बिना लक्षण वाले संक्रमण के मामलों में वायरस के प्रसार को कम कर सकता है. ऑक्सफोर्ड टीका समूह के निदेशक और परीक्षण के मुख्य अध्ययनकर्ता प्रोफेसर एंड्रयू पोलार्ड ने कहा, ‘ये निष्कर्ष दिखाते हैं कि हमारे पास एक प्रभावी टीका है जो कई लोगों की जान बचाएगा. उत्साह की बात है कि टीके की एक खुराक 90 प्रतिशत तक प्रभावी हो सकती है और इसका इस्तेमाल किया गया तो योजनाबद्ध आपूर्ति के साथ अधिक से अधिक लोगों को टीका दिया जा सकता है.’

यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड में टीकाविज्ञान की प्रोफेसर साराह गिलबर्ट ने कहा, ‘आज की घोषणा हमें ऐसे वक्त के और करीब ले जाती है जब हम कोविड-19 से होने वाली तबाही को समाप्त करने के लिए टीकों का उपयोग कर सकते हैं.’ उन्होंने कहा, ‘हम नियामकों को विस्तृत जानकारी देते रहेंगे. इस बहुराष्ट्रीय प्रयासों का हिस्सा रहना सम्मान की बात है जिससे पूरी दुनिया को फायदा होगा.’

विश्वविद्यालय के अनुसार ब्रिटेन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका में विभिन्न जातीय और भौगोलिक समूहों के 24,000 से अधिक प्रतिभागियों पर अध्ययन चल रहा है. इसके अलावा भारत, अमेरिका, केन्या और जापान में भी आगे के परीक्षण चल रहे हैं और इस साल के अंत तक परीक्षण में कुल 60,000 प्रतिभागियों को शामिल किया जा सकता है.

(इनपुट- एजेंसी भाषा)



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ब्रिटेन की वैक्‍सीन ने जगाई उम्‍मीद, साल के अंत तक दो करोड़ लोगों को डोज देगा अमेरिका

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ब्रिटेन की वैक्‍सीन ने जगाई उम्‍मीद, साल के अंत तक दो करोड़ लोगों को डोज देगा अमेरिका

कोरोना वायरस की वैक्‍सीन विकसित करने के के लिए दुनियाभर के वैज्ञानिक जुटे हुए हैं (प्रतीकात्‍मक फोटो)

खास बातें

  • ब्रिटेन का दावा, औसतन 70 फीसदी तक सफल है उसका वैक्‍सीन
  • दो अन्‍य कंपनियों ने 90 फीसदी सफलता का किया है दावा
  • कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए कड़े फैसले ले रहे यूरोपीय देश

Corona Pandemic: कोरोना वायरस की महामारी पर नियंत्रण के लिए वैक्‍सीन (coronavirus vaccine)विकसित करने को लेकर दुनियाभर में प्रयास चल रहे हैं. ब्रिटेन में एक कोरानावायरस वैक्‍सीन के निर्माताओं ने वृहद स्‍तर पर टेस्टिंग के दौरान सफलता का दावा किया है, वहीं अमेरिका (United States) ने कोरोना से बढ़ते हुए संक्रमण (infection) पर काबू पाने के लिए इस साल के अंत तक दो करोड़ लोगों को कोरोना डोज देने की योजना बनाई है. एस्‍ट्राजेनेका और ऑक्‍सफोड यूनिवर्सिटी ने दावा करते हुए कहा है कि उनका डोज कोरोना वायरस को रोकने में औसत 70 फीसदी तक सफल है. 23 हजार लोगों पर इसका टेस्‍ट किया गया. उधर दो अन्‍य दवा कंपनियों ने दावा किया है कि उनका वैक्‍सीन 90 प्रतिशत तक प्रभावी है. 

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जनवरी-फरवरी तक उपलब्‍ध करा सकते हैं वैक्‍सीन के 10 करोड़ डोज : अदार पूनावाला

कोरोना वैक्‍सीन को लेकर यह खबर ऐसे समय आई है जब यूरोप और अमेरिका कोरोना के बढ़ते केसों से निपटने की जद्दोजहद कर रहे हैं. कोरोना के केसों के कारण हेल्‍थ सिस्‍टम चरमरा गया है. सरकार को लोगों को घरों में रहने और क्रिसमस सीजन होने के बावजूद बिजनेस बंद रखने के आदेश जारी करने पड़ रहे हैं. कनाडा का सबसे बड़ा शहर सोमवार को बाद लॉकडाउन को लागू करने वाला नया शहर बना है. यहां कार्यक्रमों में लोगों के जमा होने पर रोक लगा दी गई है. शादी और अंत्‍येष्टि कार्यक्रम में भी लोगों की संख्‍या निर्धारित कर दी गई है. यह उपाय वैसे ही हैं जो फ्रांस और कुछ अन्‍य यूरोपीय देशों में लागू किए गए हैं. ओंटेरियो के प्रीमियर डग फोर्ड ने इस सप्‍ताह के शुरुआत में कहा, ‘हम अपने अस्‍पतालों को जबर्दस्‍त दबाव में नहीं डाल सकते.’ 

उधर, ऑस्‍ट्रेलिया का दूसरा सबसे बड़ा शहर धीरे-धीरे चार माह के लॉकडाउन से मुक्‍त हो रहा है. यहां एक राज्‍य से दूसरे राज्‍य की यात्रा पर लगा प्रतिबंध हटा दिया गया है. कोरोना वायरस की महामारी के कारण दुनियाभर में करीब 14 लाख लोगों को जान गंवानी पड़ी है. चीन के वुहान शहर में सबसे पहले कोरोना का केस दर्ज किया गया था.

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क्या कोरोना की चेन तोड़ने के लिए रात का कर्फ्यू पर्याप्त है?

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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